प्रेरित के वचन

सीधे जवाब

क्या मसीहियों को 10% दशमांश देना ज़रूरी है?

नहीं। दशमांश मूसा की व्यवस्था का हिस्सा था, जो इस्राएल को एक देश, एक मंदिर और एक याजक-वर्ग के लिए दी गई थी। मसीहियों को देने के लिए बुलाया गया है, पर खुले दिल से और खुशी से, दस प्रतिशत के नियम से नहीं।

नहीं, मसीहियों के लिए दस प्रतिशत दशमांश देना ज़रूरी नहीं है। दशमांश एक नियम था जो परमेश्वर ने इस्राएल को दिया था। यीशु ने उस व्यवस्था को पूरा किया। क्रूस के बाद प्रेरितों ने कभी किसी कलीसिया से दशमांश देने को नहीं कहा। उन्होंने विश्वासियों से देने को कहा, और खुशी भरे दिल से देने को कहा।

अगर आपको सारी ज़िंदगी दशमांश सिखाया गया है, तो यह सुनना कठिन लग सकता है। इसे सिखानेवाले बहुत से पास्टर यीशु से प्रेम करते हैं और अच्छे काम के लिए पैसा जुटाना चाहते हैं। हम उनके विरोध में नहीं हैं। हम बस यह पढ़ना चाहते हैं कि बाइबिल क्या कहती है।

दशमांश असल में क्या था

दशमांश मूसा की व्यवस्था का हिस्सा था। वह ज़्यादातर अनाज, दाखरस, तेल और जानवरों के बच्चे होता था, नकद पैसा नहीं। उसका बड़ा हिस्सा लेवियों को खिलाता था, यानी याजकों का वह गोत्र जिसके पास अपनी ज़मीन नहीं थी (गिनती 18:21)। उससे यरूशलेम के पर्वों का खर्च चलता था। हर तीसरे साल वह गरीबों को खिलाता था (व्यवस्थाविवरण 14:22-29)।

तो इस्राएल में एक से ज़्यादा दशमांश थे। सब मिलाकर ये दस प्रतिशत से कहीं ज़्यादा होते थे। अगर कोई कहे, “दशमांश मानो,” तो हम प्यार से पूछ सकते हैं, “कौन-सा?” आप एक पहिया रखकर उसे पूरी गाड़ी नहीं कह सकते।

यह किसको दिया गया था

दशमांश एक ही जाति के लिए बना था। उसके लिए एक मंदिर, याजकों का एक गोत्र और फसलों वाला एक देश चाहिए था। जब सन् 70 ईस्वी में रोम ने मंदिर को ढा दिया, तो वह पूरी व्यवस्था खत्म हो गई। उसे लाने के लिए कोई भण्डार बचा ही नहीं।

क्रूस पर क्या बदल गया

मसीह ने जो हमारे लिये शापित बना, हमें मोल लेकर व्यवस्था के शाप से छुड़ाया।

गलातियों 3:13

यीशु ने व्यवस्था का शाप अपने ऊपर ले लिया। जो बोझ वह उठाकर ले गया, उसे कोई आपके कंधों पर दोबारा नहीं रख सकता। पौलुस ने कहा कि व्यवस्था एक शिक्षक की तरह थी जो परमेश्वर के लोगों को यीशु तक ले गई, और “जब विश्वास आ चुका, तो हम अब शिक्षक के अधीन न रहे” (गलातियों 3:25)।

तो फिर मसीही क्या करें?

दें। दशमांश के नियम से आज़ादी, देने से आज़ादी नहीं है। नया नियम पैमाना नीचे नहीं करता। वह उसे आपकी जेब से उठाकर आपके दिल में रख देता है।

हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे; न कुढ़ कुढ़ के और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है।

2 कुरिन्थियों 9:7

पौलुस देने को “अनुग्रह का काम” कहता है (2 कुरिन्थियों 8:7)। शब्द है χάρις charis, वही शब्द जो बताता है कि परमेश्वर हमें कैसे बचाता है। देना कोई बिल नहीं जिसे आप भरते हैं। यह आपके द्वारा बहता हुआ अनुग्रह है।

व्यवस्था के अधीन लोग पूछते थे, “मुझ पर कितना बकाया है?” अनुग्रह के अधीन हम पूछते हैं, “मैं कितना दे सकूँ?” दशमांश के नियम को छोड़नेवाले बहुत से लोग पाते हैं कि वे कम नहीं, ज़्यादा देने लगे हैं। डर आपको बस रेखा तक धकेलता है। प्रेम आपको उसके पार खींच ले जाता है।

अगर आपको डर लगता है

हो सकता है किसी ने आपसे कहा हो कि आप परमेश्वर को लूट रहे हैं, या कि आपके साथ बुरा इसलिए होता है क्योंकि आपने कम दिया। आप उस डर को नीचे रख सकते हैं। परमेश्वर आपके नाम का कोई हिसाब-खाता नहीं रख रहा। उसने आपके लिए अपना पुत्र दे दिया। इसलिए दें क्योंकि आप आज़ाद हैं, अपने आप को बचाने के लिए नहीं।

और गहराई में जाएँ

यह जवाब इस शिक्षा से लिया गया है दशमांश के बारे में क्या?.

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